BLO suicide news in Hindi
BLO suicide news in Hindi :SIR के काम में लगे BLOs क्यों कर रहे हैं सुसाइड?
BLO suicide news in Hindi : भारत का चुनाव तंत्र दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था माना जाता है। चुनाव कराने, वोटर लिस्ट अपडेट करने और मतदाताओं से जुड़ी हर जानकारी को सही रखने के पीछे हजारों BLOs (Booth Level Officers) की मेहनत होती है। ये जमीनी स्तर पर काम करने वाले वे कर्मचारी हैं जिन पर पूरे चुनावी सिस्टम का भरोसा टिका होता है।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में लगातार ऐसी घटनाएँ सामने आ रही हैं जहाँ BLOs अत्यधिक तनाव, काम के दबाव और स्थानीय स्तर की परेशानियों के चलते आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे हैं। यह स्थिति न केवल दुखद है, बल्कि लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी भी है।
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि SIR (Systematic Information for Registration) यानी मतदाता सूची के डिजिटल और फील्ड वेरिफिकेशन वाले काम में लगे BLOs किन कारणों से इतना तनाव झेल रहे हैं कि वे आत्महत्या तक करने पर मजबूर हो रहे हैं। साथ ही यह भी जानेंगे कि इन समस्याओं का समाधान क्या हो सकता है।
1. SIR का काम क्या है और BLOs पर कितना दबाव डालता है?
SIR यानी Systematic Information for Registration चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है जिसमें BLOs को घर–घर जाकर निम्न कार्य करने होते हैं:
नए मतदाताओं का सत्यापन
मृत/शिफ्ट हुए मतदाताओं का हटाना
फोटो, पते और दस्तावेज़ों की जाँच
अपलोडिंग, ऑनलाइन अपडेट और रिपोर्ट तैयार करना
हर त्रुटि पर तुरंत सुधार और जवाबदेही
SIR की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह पूरा काम सीमित समय, सीमित संसाधनों, और बहुत अधिक लक्ष्य (Target) के साथ पूरा करना होता है।
एक BLO के पास कभी-कभी 800–1200 घरों तक का क्षेत्र होता है। इतनी बड़ी आबादी का फिज़िकल वेरिफिकेशन करना, दस्तावेज़ देखना, लोगों के सवाल झेलना और फिर ऑनलाइन सिस्टम में तुरंत अपडेट करना किसी भी सामान्य कर्मचारी के लिए बेहद कठिन होता है।
2. BLOs के लगातार सुसाइड के पीछे मुख्य कारण
(1) अत्याधिक काम का बोझ
कई राज्यों में BLOs को SIR के अलावा भी कई अन्य जिम्मेदारियाँ दी जाती हैं:
स्कूल का काम (यदि BLO शिक्षक है)
सर्वे
सरकारी योजनाओं का सत्यापन
पंचायत/नगरपालिका के अन्य कार्य
एक BLO के लिए रोज़ 10–12 घंटे तक फील्ड में घूमना, रिपोर्टिंग करना और बाकी काम संभालना मानसिक एवं शारीरिक तनाव को बढ़ाता है।
कई BLOs बताते हैं:
“काम इतना किया जाता है, जितनी सैलरी भी नहीं मिलती। फिर भी गलती होने पर पूरा आरोप BLO पर आता है।”
(2) लक्ष्य पूरा न करने पर दबाव, धमकी और सख्त व्यवहार
कई जगहों पर:
फोन-फोन पर टारगेट पूरे करने का प्रेशर
प्रतिदिन रिपोर्टिंग
देरी पर नोटिस की धमकी
अपमानजनक भाषा
सस्पेंशन का डर
ये सब BLOs की मानसिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित करता है। कुछ मामलों में उच्चाधिकारियों का रवैया इतना कठोर होता है कि BLOs खुद को असहाय महसूस करते हैं।
(3) कोई सुरक्षा नहीं, कोई इंसेंटिव नहीं
BLOs:
अपने खर्चे से मोबाइल,
अपने खर्चे से इंटरनेट,
कभी-कभी अपने पैसे से फोटोकॉपी/प्रिंट कराने पर मजबूर होते हैं।
इसके बावजूद कोई अतिरिक्त भत्ता नहीं मिलता। यह आर्थिक बोझ मानसिक तनाव को और बढ़ाता है।
(4) फील्ड में बदसलूकी और धमकियाँ
घर-घर जाकर सत्यापन करते समय BLOs कई समस्याओं का सामना करते हैं:
गलत जानकारी देने वाले लोग
घर के पुरुषों का बदतमीज़ व्यवहार
राजनीतिक दबाव
झूठे आरोप
कई बार लोगों की शिकायतें सीधे BLOs पर आ जाती हैं, जबकि असली गलती फॉर्म भरने वाले की होती है।
(5) परिवार को समय न दे पाने का तनाव
लंबे समय तक फील्ड में रहना, लगातार दबाव और काम का बोझ BLOs को अपने परिवार से दूर कर देता है।
कई BLOs बताते हैं कि:
बच्चों की पढ़ाई
घर के खर्च
परिवार की समस्याएँ
इन सब पर ध्यान नहीं दे पाते जिससे मानसिक थकान बढ़ती रहती है।
(6) गलतियों पर पूरा दोष BLO पर आना
मतदाता सूची में छोटी सी गलती पर भी:
नोटिस
चेतावनी
स्पष्टीकरण
सीधे BLO को दिया जाता है।
यह स्थिति BLOs को यह महसूस कराती है कि वे चाहे जितनी मेहनत कर लें, उनकी मेहनत कभी पूरी नहीं मानी जाएगी।
(7) अस्थायी या कांट्रैक्ट आधारित नियुक्तियाँ
कई BLOs स्थायी कर्मचारी नहीं होते।
इससे:
नौकरी जाने का डर
भविष्य का असुरक्षा भाव
मानसिक अस्थिरता
हमेशा बनी रहती है।
3. सुसाइड की घटनाएँ—क्यों बढ़ रही हैं?
BLOs के आत्महत्या मामलों में तीन चीज़ें सामान्य रूप से देखी जाती हैं:
(1) प्रेशर बहुत ज़्यादा, सपोर्ट बहुत कम
उच्चाधिकारियों से सहयोग की बजाय केवल दबाव मिलता है।
(2) शिकायतें और नोटिस डर को बढ़ाते हैं
छोटी-सी देरी भी BLO को मानसिक रूप से चूर-चूर कर देती है।
(3) मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी
किसी भी विभाग में BLOs के मानसिक तनाव को गंभीरता से नहीं लिया जाता।
SIR की रिपोर्टिंग, ऐप की दिक्कत, सर्वर की समस्या, रिजेक्टेड फॉर्म… ये सब BLO के मन में डर और बेचैनी पैदा करते हैं। जब तनाव एक सीमा पार कर जाता है, कुछ कमजोर पल हिंसक निर्णयों की ओर ले जाते हैं।
4. BLOs की परेशानियों को देखकर एक बड़ा सवाल उठता है—
क्या इस तरह के हालात में कोई भी व्यक्ति सामान्य रह सकता है?**
बिल्कुल नहीं।
जब एक इंसान:
लगातार दबाव
काम का बोझ
परिवार की चिंता
ऊपर से सस्पेंशन का डर
इन सबको अकेला झेलता है, तो मानसिक टूटन स्वाभाविक है।
5. BLO क्यों नहीं बोलते?
कई लोग यह सवाल उठाते हैं कि BLO पहले से शिकायत क्यों नहीं करते?
इसके कई कारण हैं:
नौकरी जाने का डर
अधिकारी नाराज़ हो जाएँगे
ट्रांसफर या धमकी
किसी को परवाह नहीं होगी
“काम नहीं करना चाहते” कहकर मजाक उड़ाया जाएगा
इसी चुप्पी का परिणाम मानसिक तनाव बनता जाता है और अंत में कई लोग आत्महत्या कर लेते हैं।
6. इस स्थिति को रोकने के लिए क्या जरूरी है?
(1) BLOs के लिए मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन
हर जिले में BLO हेल्पडेस्क और काउंसलिंग की आवश्यकता है।
(2) कार्य समय कम और लक्ष्य यथार्थ हों
900–1200 घर एक BLO के लिए व्यावहारिक नहीं हैं।
क्षेत्र सीमित किए जाएँ।
(3) फील्ड कार्य के लिए सुरक्षा और सम्मान
BLO अकेले फील्ड में न जाएँ।
प्रतिनिधि या होमगार्ड साथ हो।
(4) अतिरिक्त भत्ता और संसाधन
इंटरनेट, मोबाइल, स्टेशनरी आदि का खर्च सरकार वहन करे।
(5) अधिकारी अपने व्यवहार में सुधार लाएँ
इंसानियत हमेशा प्राथमिकता होनी चाहिए।
सिर्फ टारगेट पूरा कराने के लिए धमकाना समाधान नहीं है।
(6) डिजिटल ऐप्स को आसान और स्थिर बनाया जाए
सर्वर की समस्या और ऐप क्रैश BLOs की सबसे बड़ी परेशानी है।
तकनीकी सुधार जरूरी है।
7. निष्कर्ष
BLOs चुनाव प्रणाली की रीढ़ की हड्डी हैं।
उनके बिना मतदाता सूची शुद्धिकरण, बूथ लेवल सत्यापन, वेरिफिकेशन—कुछ भी संभव नहीं।
फिर भी वे:
कम वेतन,
ज़्यादा काम,
दबाव,
अपमान
और असुरक्षा
जैसी परिस्थितियों में काम करते हैं।
यदि समय रहते उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो न केवल BLOs टूटते रहेंगे, बल्कि लोकतांत्रिक ढांचा भी कमजोर होगा।
हर BLO एक परिवार का सदस्य है।
उनकी सुरक्षा, सम्मान और मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।





