LGBTQ kya hai ?
LGBTQ kya hai ? :-पहचान, संघर्ष, अधिकार और समाज आज की दुनिया पहले से अधिक तेजी से बदल रही है। जानकारी, तकनीक, सोच और विचारों की मुक्त अभिव्यक्ति ने समाज को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। इसी बदलते दौर में, LGBTQ+ समुदाय और उनसे जुड़ी पहचानें (Identities) चर्चा का एक महत्त्वपूर्ण विषय बन चुकी हैं।
यह विषय केवल किसी समूह की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवाधिकार, समानता, स्वतंत्रता और सम्मान जैसे मूल्यों से सीधा जुड़ा हुआ है।इस लेख में हम समझेंगे कि LGBTQ+ क्या है, इसका इतिहास, समुदाय को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, भारत में इस विषय की कानूनी स्थिति क्या है, और किस तरह समाज एक समावेशी भविष्य की ओर बढ़ सकता है।
LGBTQ+ क्या है?
LGBTQ+ एक अंग्रेज़ी संक्षिप्त शब्द है, जिसका अर्थ है:
L – Lesbian → ऐसी महिलाएँ जो महिलाओं की ओर आकर्षित होती हैं
G – Gay → ऐसे पुरुष जो पुरुषों की ओर आकर्षित होते हैं
B – Bisexual → जो पुरुष और महिला दोनों की ओर आकर्षित हों
T – Transgender → जिनकी gender identity जन्म के समय दिए गए लिंग से अलग होती है
Q – Queer → जो पारंपरिक लेबलों में फिट नहीं होते और अपनी sexuality/gender को openness के रूप में देखते हैं
+ → बाकी सभी पहचानें, जैसे pansexual, asexual, non-binary, gender-fluid आदि
यह शब्द एक छाते (Umbrella) की तरह है, जिसके नीचे विविध पहचान और अनुभव आते हैं।
LGBTQ+ पहचान का मूल महत्व
हर व्यक्ति की तरह LGBTQ+ लोग भी
प्यार करने
अपनी पहचान चुनने
अपने जीवन के निर्णय लेने
का अधिकार रखते हैं।
लेकिन सदियों तक समाज ने पारंपरिक धारणा के कारण इन पहचान को स्वीकार नहीं किया, जिससे भेदभाव, शर्म और भय पैदा हुआ।
लिंग (Gender) और यौन आकर्षण (Sexual Orientation) किसी की व्यक्तिगत प्रकृति का हिस्सा है।
यह किसी की पसंद, शौक या फैशन नहीं— बल्कि उसकी अंदरूनी पहचान है।
LGBTQ+ का इतिहास: छुपाव से स्वीकार्यता तक
इतिहास बताता है कि समलैंगिकता कोई आधुनिक विचार नहीं है।
दुनिया के लगभग हर प्राचीन समाज में इसके उदाहरण मिलते हैं:
भारत में पुरालेखों में उदाहरण:
खजुराहो और कोणार्क मंदिरों की मूर्तियाँ
महाभारत में शिखंडी
अरावानियों की परंपरा
कई जनजातियों में third gender की मान्यता
लेकिन विदेशी शासन के दौरान भारत में समलैंगिकता को अपराध बना दिया गया।
ब्रिटिश सरकार ने 1861 में IPC की धारा 377 लागू की, जिसने समलैंगिक संबंधों को “अप्राकृतिक अपराध” कहा।
धारा 377 और आज़ादी की लड़ाई
LGBTQ+ समुदाय ने वर्षों तक कानूनी मान्यता और सम्मान के लिए संघर्ष किया।
2009 – दिल्ली हाईकोर्ट ने धारा 377 को असंवैधानिक बताया।
2013 – सुप्रीम कोर्ट ने इसे फिर से अपराध माना।
2017 – निजता का अधिकार मूल अधिकार माना गया।
6 सितंबर 2018 – सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया।
यह LGBTQ+ समुदाय की ऐतिहासिक जीत थी।
अब भारत में समलैंगिक संबंध अपराध नहीं है।
LGBTQ+ लोग किन चुनौतियों का सामना करते हैं?
कानून बदलने के बावजूद सामाजिक व्यवहार तेजी से नहीं बदलता।
LGBTQ+ लोग कई समस्याओं से गुजरते हैं:
परिवार में अस्वीकार
बहुत से लोग अपनी पहचान बताने से डरते हैं क्योंकि:
माता-पिता गुस्सा करते हैं,
रिश्तेदारी ताने देती है,
बच्चे को गलत समझा जाता है।
स्कूल और कॉलेज में बुलीइंग
छात्रों को अक्सर चिढ़ाया जाता है:
चाल-ढाल पर टिप्पणी
नाम लेकर बुलाना
अलग कर देना
नौकरी और आर्थिक संघर्ष
कई ट्रांसजेंडर लोगों को:
नौकरी नहीं मिलती
किराए पर घर नहीं मिलता
बैंक खाते जैसी सुविधाएँ भी मुश्किल से मिलती हैं
इस कारण कई लोग भीख, नाच-गाना या सेक्स वर्क जैसी मजबूरी में जाते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य
भय, दबाव और शर्म के कारण:
तनाव
चिंता
अवसाद
आत्महत्या के विचार
के मामले अधिक देखने को मिलते हैं।
सामाजिक हिंसा
कई लोग सड़क पर, कार्यस्थल पर या परिवार के भीतर भी हिंसा का शिकार होते हैं।
एल जी बी टी क्यू + और समाज: भ्रम और सच
भ्रम : LGBTQ+ होना फैशन है।
सच: यह जन्मजात और प्राकृतिक है। फैशन बदलता है, पहचान नहीं।
भ्रम : यह “बीमारी” है।
सच: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 1990 में ही कहा कि समलैंगिकता बीमारी नहीं है।
भ्रम : यह संस्कृति के खिलाफ है।
सच: भारत के प्राचीन ग्रंथ और कला इससे भरे पड़े हैं।
भ्रम : इन लोगों को “ठीक” किया जा सकता है।
सच: ऐसा कोई इलाज नहीं है, और “conversion therapy” कई देशों में अपराध है।
कानून और अधिकार: भारत में स्थिति
समलैंगिक संबंध अपराध नहीं
2018 का निर्णय LGBTQ+ इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ है।
Transgender Persons Act 2019
इस कानून ने ट्रांसजेंडर लोगों को:
पहचान पत्र
नौकरी
शिक्षा
स्वास्थ्य सुविधाओं
का अधिकार दिया।
अभी भी बाकी मुद्दे:
समान विवाह (same-sex marriage) की कानूनी मान्यता नहीं
दत्तक अधिकार स्पष्ट नहीं
परिवारिक कानूनों में संशोधन की आवश्यकता
परिवार और समाज की भूमिका
किसी एल जी बी टी क्यू + व्यक्ति के लिए परिवार का समर्थन सबसे बड़ा सहारा होता है।
अगर परिवार:
बात सुने
समझने की कोशिश करे
दबाव न बनाए
सम्मान दे
तो उसकी जिंदगी आसान हो सकती है।
समाज का कर्तव्य है कि वह किसी की पहचान पर सवाल उठाने के बजाय यह समझे कि हर इंसान को प्यार और सम्मान पाने का अधिकार है।
मीडिया, सिनेमा और सोशल मीडिया का प्रभाव
फिल्में और वेब सीरीज़ LGBTQ+ विषयों पर आधारित होकर समाज में जागरूकता बढ़ा रही हैं, जैसे:
मार्गरीटा विथ ए स्ट्रॉ
शुभ मंगल ज़्यादा सावधान
Chandigarh Kare Aashiqui
सोशल मीडिया ने LGBTQ+ लोगों को अपनी आवाज उठाने का प्लेटफॉर्म भी दिया है।
LGBTQ+ और भविष्य
भविष्य में समाज और भी खुला और समझदार बनेगा।
स्कूल, दफ्तर, अस्पताल, कानून और मीडिया में जागरूकता बढ़ रही है।
नई पीढ़ी जेंडर और सेक्सुअलिटी को अधिक सहजता से समझ रही है।
समावेशी समाज (Inclusive Society) बनने के लिए हमें: भेदभाव खत्म करना होगा गलत धारणाएँ तोड़नी होंगी सम्मान और बराबरी को बढ़ावा देना होगा
निष्कर्ष conclusion
भारतीय विवाह संस्कार
एल जी बी टी क्यू + समुदाय सिर्फ एक समूह नहीं— यह मानव विविधता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।इनकी पहचान उतनी ही प्राकृतिक है जितनी किसी अन्य की।
एक बेहतर समाज वही है जो किसी को भी: उसकी पहचान के कारण उसके प्यार के कारण उसके लिंग के कारण नीचा न दिखाए।
दुनिया तभी सुंदर बनती है जब हर इंसान अपने असली रूप में जी सकेबिना डर के, बिना शर्म के, और पूरी स्वतंत्रता के साथ।
Lesbian (लेस्बियन)
परिभाषा:
ऐसी महिलाएँ, जो भावनात्मक, रोमांटिक या यौन रूप से दूसरी महिलाओं की ओर आकर्षित होती हैं, उन्हें Lesbian कहा जाता है।
आसान शब्दों में:
एक लड़की जिसे लड़कियाँ पसंद हों → वह लेस्बियन कहलाती है।
महत्व:
यह एक प्राकृतिक यौन आकर्षण है, यह न बीमारी है, न आदत, न फैशन।
Gay (गे)
परिभाषा:
ऐसे पुरुष, जो पुरुषों की ओर आकर्षित होते हैं, उन्हें Gay कहते हैं।
आसान शब्दों में:
एक लड़का जिसे लड़के पसंद हों → वह गे कहलाता है।
नोट:
कई जगह “Gay” शब्द का इस्तेमाल महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए भी किया जाता है, लेकिन आमतौर पर इसका उपयोग पुरुषों के लिए अधिक होता है।
Bisexual (बाइसेक्शुअल)
परिभाषा:
ऐसे लोग जो पुरुष और महिला दोनों की ओर आकर्षित हो सकते हैं, उन्हें Bisexual कहा जाता है।
आसान शब्दों में:
एक व्यक्ति जिसे लड़के भी पसंद आ सकते हैं और लड़कियाँ भी → वह बाइसेक्शुअल है।
जरूरी बात:
बाइसेक्शुअल होना मतलब 50–50 आकर्षण होना नहीं। किसी का झुकाव एक तरफ ज्यादा भी हो सकता है।
Transgender (ट्रांसजेंडर)
परिभाषा:
ऐसे लोग जिनकी gender identity, जन्म के समय दिए गए लिंग (Male/Female) से अलग होती है, उन्हें Transgender कहा जाता है।
आसान शब्दों में:
जन्म से पुरुष घोषित, लेकिन खुद को महिला महसूस करते हैं → ट्रांस वुमन
जन्म से महिला घोषित, लेकिन खुद को पुरुष महसूस करती हैं → ट्रांस मैन
मुख्य बात:
यह यौन आकर्षण (sexuality) नहीं बल्कि gender identity है।
Queer (क्वीयर)
परिभाषा:
Queer एक छाता शब्द (umbrella word) है, जिसका उपयोग उन लोगों के लिए किया जाता है जो अपनी sexuality या gender identity को पारंपरिक लेबलों में फिट नहीं मानते।
आसान शब्दों में:
जो न सिर्फ़ straight हो, न gay, न bisexual, बल्कि अपनी पहचान को खुला, लचीला (fluid) और अलग मानते हों → वे खुद को Queer कह सकते हैं।
महत्व:
इस शब्द से इंसान अपनी पहचान को बिना किसी सख़्त लेबल के व्यक्त कर सकता है।यह विविधता और स्वतंत्रता को दर्शाता है।
LGBTQ – 10 Q&A
LGBTQ क्या है?
LGBTQ एक समुदाय है जिसमें Lesbian, Gay, Bisexual, Transgender और Queer लोग शामिल होते हैं। यह अलग-अलग लैंगिक पहचान और यौन रुझान वाले लोगों को दर्शाता है।
Lesbian किसे कहते हैं?
जब कोई महिला किसी महिला की ओर रोमांटिक या शारीरिक आकर्षण महसूस करे, उसे Lesbian कहा जाता है।
Gay का मतलब क्या है?
जब कोई पुरुष किसी पुरुष की ओर आकर्षित हो, उसे Gay कहते हैं। कभी-कभी यह शब्द पूरे LGBTQ समुदाय के लिए भी इस्तेमाल होता है।
Bisexual का अर्थ क्या है?
जब कोई व्यक्ति पुरुष और महिला दोनों की ओर आकर्षित होता है, तो उसे Bisexual कहते हैं।
Transgender कौन होते हैं?
Transgender वे लोग होते हैं जिनकी gender identity (लैंगिक पहचान) जन्म के समय दिए गए लिंग से अलग होती है।
जैसे—जन्म पर male माना गया व्यक्ति खुद को female मानता हो या इसके उलट।
Queer का मतलब क्या है?
Queer एक छत्र शब्द (umbrella term) है जो उन सभी लोगों को दर्शाता है जिनकी sexual orientation या gender identity पारंपरिक मानकों से अलग होती है।
क्या LGBTQ लोग जन्म से ऐसे होते हैं?
हाँ, अधिकतर मामलों में sexual orientation और gender identity प्राकृतिक होती है। यह कोई बीमारी, आदत या सीखने की चीज नहीं है।
क्या LGBTQ होना गलत है?
नहीं, LGBTQ होना बिल्कुल सामान्य है। दुनिया के कई देशों में LGBTQ लोगों के अधिकारों को मान्यता दी गई है।
क्या LGBTQ लोग शादी कर सकते हैं?
यह देश पर निर्भर करता है। कुछ देशों में Same-Sex Marriage कानूनी है, जबकि कुछ में अभी कानून नहीं बना है।
समाज LGBTQ लोगों को कैसे समझ और स्वीकार कर सकता है?
समाज को भेदभाव हटाकर उन्हें समान सम्मान, समान अधिकार और समर्थन देना चाहिए।सबसे बड़ी बात—उनकी पहचान को समझना और स्वीकार करना।
what is shemale ?
Shemale शब्द आम तौर पर ऐसे व्यक्ति के लिए प्रयोग किया जाता है जिनमें जन्म से या पहचान के स्तर पर पुरुष और महिला दोनों के कुछ शारीरिक या लैंगिक गुण पाए जाते हैं। आज के समय में इसे अधिक सम्मानजनक रूप से ट्रांसजेंडर या इंटरसेक्स व्यक्ति कहा जाता है। समाज में इनके अधिकार, सम्मान और समानता बहुत महत्वपूर्ण हैं।पहले नोट नकली निकलते थे अब लोग नकली निकलते हैं।





